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सतत विकास अपने पर्यावरण और सामाजिक ज़िम्मेदारियों को समझना

पावर ग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लि. (पावरग्रिड) एक आईएसओ 14001 प्रमाणित कंपनी और दुनिया की सबसे बड़ी वैद्युत शक्ति पारेषण उपयोगिताओं में से एक है। अपने कारोबार की प्रकृति के अनुरूप, हम हर दिन लाखों ज़िंदगियों तक पहुँचते हैं और यह समझते हैं कि वास्तविक सफलता सभी लोगों और भागीदारों के सामूहिक विकास का ही परिणाम है।  

हमारे कार्यकलापों की प्रकृति ही ऐसी है कि हमारे विकास संबंधी गतिविधियों का पर्यावरण और सामाज पर बहुत कम प्रभाव पड़ता है क्योंकि हमें भूमि, हवा या पानी में किसी प्रदूषक के निशर्जन की ज़रूरत नहीं होती, न ही हम बड़े पैमाने पर उत्खनन करते हैं जिससे मिट्टी का कटाव हो। इसके बावजूद, पावरग्रिड, जो निर्वहनीय विकास के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है, ने यह महसूस किया कि इसके प्रचालनों के आकार को ध्यान में रखते हुए, यह अपरिहार्य है कि प्राकृतिक पर्यावरण और समुदाय दोनों के ऊपर कुछ तो प्रभाव पड़ता है। इन मुद्दों का समाधान करने के लिए, पावरग्रिड ने पर्यावरण एवं सामाजिक नीति एवं प्रक्रियाएँ (ईएसपीपी) को प्रतिपादित करते हुए पर्यावरण और सामाजिक प्रबंध प्रक्रियाओं को अपने कार्पोरेट प्रचालनों में एकीकृत किया है।

 

पावरग्रिड की पर्यावरण एवं सामाजिक नीति एवं प्रक्रियाएँ (ईएसपीपी)

पावरग्रिड एशिया की पहली कंपनी है जिसने पारेषण संबंधी परियोजनाओं के पर्यावरण एवं सामाजिक मुद्दों को सुलझाने के लिए एक व्यापक और लिखित "पर्यावरण एवं सामाजिक नीति एवं प्रक्रियाएँ (ईएसपीपी)" विकसित किया है । पावरग्रिड ने अपने भागीदारों, आम जनता, विधुत मंत्रालय, सीईए, राज्य बिजली बोर्ड, संबंधित संगठनों, शिक्षा जगत, गैर सरकारी संस्थाओं, बहुपक्षीय वित्त-पोषण एजेंसियों के प्रतिनिधियों तथा परियोजना से प्रभावित व्यक्तियों (पीएपी) से राष्ट्रव्यापी परामर्श करते हुए वर्ष 1998 में अपना ईएसपीपी विकसित किया। ईएसपीपी के मूलभूत सिद्धांत वर्जन, न्यूनीकरण और प्रशमन हैं जो इसकी परियोजनओं से संबंधित पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों से निपटने के लिए पावरग्रिड की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हैं और उनके लिए प्रबंधन की प्रक्रियाएँ और प्रोटोकाल निर्धारित करते हैं। ईएसपीपी को भारत सरकार के परिवर्तित नियमों तथा दिशा-निर्देशों के अनुसार अद्यतन बनाए रखने के लिए वर्ष 2005 और 2009 में पुनरीक्षित किया गया जिसमें बहुपक्षीय वित्त-पोषण करने वाली एजेंसियाँ जैसे विश्व बैंक, एडीबी, जेबीआईसी आदि एवं विभिन्न साइटों से प्राप्त तथा सुझाव/सर्वोत्तम पद्धतियाँ प्रतिपुष्टि भी शामिल है। ईएसपीपी के पुनरीक्षण के दौरान, परियोजना से प्रभावित व्यक्तियों (पीएपी) और स्थानीय समुदायों सहित सभी भागीदारों को शामिल करने के लिए इस परामर्शी प्रक्रिया को और विस्तारित किया गया। देश के दक्षिणी, पश्चिमी, उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में क्षेत्रीय स्तर पर परामर्श कार्यक्रम आयोजित किए गए। राष्ट्रीय परामर्शदात्री कार्यक्रम गुड़गांव में कंपनी के कार्पोरेट कार्यालय में आयोजित किया गया।

ईएसपीपी के व्यापक कवरेज और सामग्री का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसे दुनिया की दो प्रमुख बहुपक्षीय एजेंसियों यानी विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक द्वारा देश प्रणाली का उपयोग (यूसीएस) एवम देशीय संरक्षा प्रणाली के तहत विस्तृत और बहुस्तरीय मूल्यांकन के पश्चात क्रमश वर्ष 2009 एवम 2017  में प्रमाणित और स्वीकृत होने का गौरव प्राप्त हुआ है I हमारा उद्देश्य परियोजना प्रबंधन के प्रत्येक चरण में ,अपनी सुपरिभाषित प्रकिर्यो के माध्यम से अपने हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित करना एवम उनके साथ पारदर्शिता बरतना है

ईएसपीपी में पावरग्रिड की प्रतिबद्धता इस तरह बताई गई है -

  • क सुपरिभाषित सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया तथा परियोजना के कार्यान्वयन की प्रत्येक अवस्था के बारे में संबंधित सूचना का प्रसार करते हुए अपने सभी भागीदारों जैसे संबंधित सरकारी एजेंसियाँ, स्थानीय समुदाय, वैयक्तिक भू-स्वामियों तथा कर्मचारियों के साथ व्यवहार करते समय पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करना ।
  • न केवल अपने कर्मचारियों के प्रति बल्कि अपने उपभोक्ताओं तथा समाज के प्रति कार्पोरेट उत्तरदायित्व, सामाजिक-आर्थिक विकास बढ़ाने के लिए तथा सबसे महत्वपूर्ण, जन सहभागिता के माध्यम से विभिन्न समुदाय विकास कार्यकलापों के ज़रिए सामाजिक उत्तरदायित्व के उच्चतम मानक बनाए रखना।
  • सिविल ढांचों की आवश्यकता पर जागरूकतापूर्वक किफायत बरतते हुए, राइट ऑफ वे (आरओडबल्यू) की व्यापकता कम करते हुए, बहु-सर्किट टॉवरों को अपनाते हुए और पारेषण में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी अपनाते हुए प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को कम करना।

सतत विकास

एक जिम्मेदार कार्पोरेट नागरिक होने के नाते , पावरग्रिड तकनीकी, आर्थिक और पर्यावरण संबंधी प्रतिबद्धताओं की अक्सर प्रतिस्पर्धी मांगों में संतुलन स्थापित करने की कोशिश करती है। यह निगम अपने सभी प्रचालनों में प्राकृतिक पर्यावरण को यथासंभव संरक्षित रखने और उसे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और इसने पर्यावरणीय विधान के अनुपालन से बढ़कर और आगे जाने का लक्ष्य तय किया है। पावरग्रिड पाँच अंतर्संयोजित विषयों के माध्यम से निर्वहनीय विकास हासिल करने के लिए प्रयासरत है पणधारक, पर्यावरण, नेटवर्क, सांख्यिकी और कर्मचारी । निर्वहनीय विकास का महत्व निगम समझती है और इन आवश्यक तत्वों को अपने सभी कार्यकलापों में अंत:स्थापित किया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि निर्वहनीय विकास के संवर्धन के लिए किए गए प्रयास सफल हों।

पावरग्रिड दुनिया की पहली बिजली उपयोगिता वाली कंपनी है जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध विनिर्देश, पीएएस 99:2012 आधारित एकीकृत प्रबंध प्रणाली (आईएमएस) से प्रत्यापित है, जिसमें आईएसओ 9001:2015 (गुणता प्रबंध प्रणाली), आईएसओ 14001:2015 (पर्यावरण प्रबंध प्रणाली) और आईएसओ 45001:2018 (व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं संरक्षा प्रबंध प्रणाली) शामिल हैं। कंपनी अपने मानव संसाधन तथा श्रम प्रबंध नीतियों एवं पद्धतियों के लिए सामाजिक जवाबदेही मानक एसए 8000:2014 के लिए भी प्रमाणित है।

 

पारदर्शिता

पारदर्शिता जवाबदेह होने की मूलभूत विशेषता है। पावरग्रिड ने ग्लोबल रिपोर्टिंग इनिशिएटिव (जीआरआई) दिशानिर्देशों के आधार पर मार्च,10 में वित्त वर्ष 2008-09 के लिए अपनी पहली स्थिरता रिपोर्ट लाने के लिए देश के बिजली क्षेत्र में पहला पीएसयू बनकर पारदर्शिता के सिद्धांत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पहले ही दिखा दी है। वित्त वर्ष 2009-11 के लिए दूसरी स्थिरता रिपोर्ट मार्च, 2013 में जारी की गई थी। वित्तीय वर्ष 2011-13 के लिए तीसरी स्थिरता रिपोर्ट सितंबर, 2015 में जारी की गई थी। वित्त वर्ष 2013-15 और वित्तीय वर्ष 2015-17 के लिए चौथी और पांचवीं स्थिरता रिपोर्ट क्रमशः जनवरी 2018 और जून 2018 में खुलासा किया गया था। वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए छठी स्थिरता रिपोर्ट सितंबर '2020 में जारी की गई थी। पहली तीन सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट ग्लोबल रिपोर्टिंग इनिशिएटिव (जीआरआई), एम्स्टर्डम, नीदरलैंड के सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत जी 3 दिशानिर्देशों पर आधारित थीं, जबकि चौथी और पांचवीं रिपोर्ट ग्लोबल रिपोर्टिंग इनिशिएटिव के जी 4 दिशानिर्देशों पर आधारित थीं। छठी रिपोर्ट जीआरआई के सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग मानकों के "कोर" विकल्प के अनुसार तैयार की गई थी। जवाबदेही, यूके मानक AA1000APS (2008), AA1000SES (2011), AA1000SES (2015) और AA1000AP (2018) जैसे अंतर्राष्ट्रीय मानकों का पालन करते हुए अंतिम पांच रिपोर्टों को बाहरी रूप से आश्वस्त किया गया था। इन रिपोर्टों ने पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था पर हमारे प्रभाव से संबंधित डेटा का खुलासा करते हुए सतत विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए की गई कुछ पहलों पर प्रकाश डाला। चूंकि कंपनी की गतिविधियों का न्यूनतम पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव होता है, इसलिए कंपनी अपनी स्थिरता रिपोर्ट द्विवार्षिक रूप से प्रकाशित करती है। वित्तीय वर्ष 2019-21 के लिए 7वीं स्थिरता रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है।

पर्यावरण संरक्षण के पहल

लाइनें बिछाते समय पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों का वर्जन

पारेषण लाइनों के निर्माण करने में वनों की समाविष्टि अत्यधिक कम की गई है। उदाहरण के लिए, वनों को समाविष्टि जो 1998 तक 27,000 सर्किल कि.मी. लाइनों में लगभग 6% थी। जबकि, 1998 से प्रभावी करते हुए ईएसपीपी के कार्यान्वयन के बाद, वन क्षेत्र के विपथन को 1998 से मार्च 2021 2020 के दौरान लगभग 134779 सर्किट कि.मी. के परिवर्धन को विचार में लेते हुए लगभग 2.12 % तक कम किया गया।

 

 

हरित संस्थापन

नई एवं नवीकरणीय उर्जा का प्रयोग करने के एक अग्रिम कदम के रूप में, 10 कि.वॉ. हाइब्रिड सृजन संयंत्र जिसमें 4 कि.वॉ. सौर फ़ोटो वोल्टाइक और 6 कि.वॉ. पवन ऊर्जा सृजन अप्रैल, 2009 में मपूसा (गोवा) सब -स्टेशन में शुरु किया गया। इसके साथ ही मपूसा सब -स्टेशन ने अपनी आंतरिक खपत के लिए हरित ऊर्जा का इस्तेमाल करना शुरु कर दिया। यह प्रणाली लगभग 30 कि.वॉ.घं. प्रति दिन की बिजली पैदा कर रही है जिसका इस्तेमाल सामुदायिक केन्द्र, बच्चों के उद्यान और कुछ स्ट्रीट लाइटों के लिए किया जा रहा है। तदुपरांत 5 कि.वॉ. से 50 कि.वा. तक के सौर संयंत्र विभिन्न सब -स्टेशनों में स्थापित किए गए।

 

निर्वहनीयता कि दिशा में, 50 कि.वॉ. पी. ग्रिड अंतरक्रियात्म सौर पीवी सिस्टम सिंतबर, 2015 के दौरान पावरग्रिड के कार्पोरेट केन्द्र, गुड़गांव में लगाया गया। इससे कॉम्पलेक्स की कुल ऊर्जा आवश्यकता का लगभग 3-4 % आवश्यकता पूरी होगी और साथ ही, लगभग 40 टन प्रतिवर्ष C02 की कटौती होगी। जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने में सौर ऊर्जा के महत्व को स्वीकार करते हुए, पावरग्रिड अपने सबस्टेशन परिसरों और अन्य प्रतिष्ठानों में सौर स्ट्रीट लाइटिंग और सौर पीवी सिस्टम स्थापित कर रहा है। इसने 70 से अधिक स्थानों को कवर करते हुए लगभग 6 MWp रूफटॉप सोलर PV सिस्टम पहले ही स्थापित कर लिए हैं, जो संचयी रूप से सालाना लगभग 8 मिलियन यूनिट बिजली पैदा कर रहे हैं, जिससे CO2 उत्सर्जन लगभग 8000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष कम हो गया है। । इसके अलावा 65 स्थानों पर अतिरिक्त 5 मेगावाटपी रूफटॉप सोलर पीवी सिस्टम की स्थापना का कार्य प्रगति पर है।

अपने कार्बन पदचिह्न को और कम करने के लिए, पावरग्रिड ने मानेसर और क्षेत्रीय कार्यालय, बेंगलुरु में भवनों के लिए "एकीकृत आवास मूल्यांकन के लिए हरित रेटिंग" (गृह) मानदंडों को अपनाया। 2015 में "ग्रीन बिल्डिंग" श्रेणी के तहत हुडको द्वारा बेंगलुरु भवन को दूसरा पुरस्कार दिया गया है। अपशिष्ट जल के उचित उपचार और बागवानी जैसे विभिन्न उद्देश्यों के लिए उपचारित पानी के उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का भी निर्माण किया गया था।

राइट ऑफ वे (आरओडबल्यू) की आवश्यकता कम करना

नवोन्मेषी टॉवर डिज़ाइन विकसित करने से, आरओडबल्यू की आवश्यकता 765 कि.वॉ. के लिए 85 मी. से 64 मी. तक और 400 के.वी. डी/सी लाइन के लिए 52 मी. से 46 मी. तक कम की गई। इसके अलावा, अत्यधिक सघन जनसंख्या में 400 कि.वॉ. पारेषण लाइन के लिए पोल टाइप टावर की संस्थापना से न केवल राइट आफ वे और बेस विड्थ (नीव की स्थापना में भूमि) की आवश्यकता में कमी आई बल्कि यह पारंपरिक टावर की तुलना में अधिक सुंदर भी है।

ईकोसिस्टम की संरक्षा के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी का प्रयोग

पारिस्थितिकी सवंदेनशील  क्षेत्रों (85 मीटर लंबे टावर स्थापना के फलस्वरुप टिहरी पारेषण लाइन में, राजाजी राष्ट्रीय उद्यान में सिर्फ 14739 वृक्षों का पातन, पूर्व प्राक्लित 90000 वृक्षों की तुलना में कम किया गया) में वन्य जीवन, वृक्षों को संरक्षित करने के लिए नवोन्मेषी टॉवर डिज़ाइन जैसे बहु-सर्किट और बहुत लंबे टॉवरों को अपनाना।

 पारेषण लाइनों के निर्माण के लिए राइट ऑफ वे की चौड़ाई घटाने के लिए समय-समय पर नई प्रौद्योगिकियाँ अपनाई गई जो निम्नलिखित टेबल से स्पष्ट है -

कच्चे माल की आवश्यकता में कटौती

प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति पावरग्रिड का योगदान और सामग्री की अधिकता को कम करने के इसके प्रयास कार्पोरेट निर्वहनीयता रणनीति के अभिन्न हिस्से हैं। कच्चे माल की बड़ी मात्रा जैसे लोहा, स्टील, अल्यूमिनियम को विगत वर्षो  के दौरान कम किया गया है। अधिक शक्ति का पारेषण करने वाले वाली उच्च क्षमता की पारेषण लाइनों का प्रोयग करते हुए प्रौद्योगिकीय नवोन्मेष के माध्यम से यह लक्ष्य हासिल किया गया। उदाहरण के लिए, उच्च-तापमान के निम्न झुकाव वाले कंडक्टरों के प्रयोग से शक्ति वहन करने की क्षमता बढ़ती है और इस तरह, सामग्री की खपत कम होती है और अतिरिक्त पारेषण लाइनों की ज़रूरत का निराकरण होता है।

प्राकृतिक संसाधनों की पुन: पूर्ति

लगभग हर सब -स्टेशन में लगभग 2 से 4 एकड़ ज़मीन पर स्थानीय वन विभाग के परामर्श से उपयुक्त प्रजातियों के पादपों से वनीकरण किया जा रहा है। जहाँ व्यवहार्य है, इस प्रयोजन के लिए अलग कोष की भी व्यवस्था की गई है। 

पावरग्रिड ने अपने सब -स्टेशन में वर्षा जल संग्रहण को अपनाया और पानी के संरक्षण और भूजल के पुनर्भरण के लिए प्रयुक्त / अपशिष्ट पानी का संग्रहण किया। जल संरक्षण एवम भूमिगत जल भराव की निरन्तता सुनिश्चित करने हेतु पॉवरग्रिड ने वर्षा जल संरक्षण को अपने उपकेंद्रों को डिज़ाइन में एकीकृत रूप में अपनाया  

पावरग्रिड ने पर्यावरण को होने वाली क्षति को कम करने के लिए घने जंगलों और ढलाऊ इलाकों में मानवीय स्टिंगिंग की पद्धति अपनाया ।

मैनुअल स्ट्रिंजिंग

पर्यावरण संरक्षण व्यय निम्नलिखित मदों पर किए गए -

  • प्रतिपूरक वनीकरण

•    स्वैच्छिक वृक्षारोपण 
•   
वर्षाजल संग्रहण
•    ईएमपी का कार्यान्वयन
•    प्रमाणीकरण, परामर्शी प्रभार एवं जागरूकता प्रशिक्षण कार्यक्रम आदि।

पर्यावरण प्रबंधन पर किया गया लगातार और अधिक खर्च पर्यावरण संरक्षण / प्रतिरक्षण के लिए पावरग्रिड की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सामाजिक प्रभाव को कम करना

पावरग्रिड सर्वाधिक खाली न्यूनतम ज़मीन की आवश्यकता के लिए पारंपरिक उप-स्टेशनों के स्थान पर काम्पैक्ट जीआईएस उप-स्टेशनों को स्थापित कर रही है और सामाजिक प्रभाव को कम करने के लिए सरकारी ज़मीन पर उप-स्टेशन स्थापित करने की कोशिश करती है

अपनी पारेषण लाइनों से जुड़े सामाजिक प्रभावों को कम करने के लिए, पावरग्रिड आबादी वाले क्षेत्र और अन्य सामाजिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों जैसे धार्मिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के स्थानों से बचकर आवश्यक सावधानी बरतता है और ज्यादातर कृषि या सरकारी जमीन के माध्यम से अपनी लाइनों का लगाने की कोशिश करता है। कृषि भूमि से गुजरने वाली लाइनों के मामले में, राजस्व अधिकारियों द्वारा किए गए आकलन के अनुसार पेड़ और फसल के नुकसान के मुआवजे का भुगतान भूमि मालिकों को किया जाता है। हमारी गतिविधियों के सामाजिक पदचिह्नों को  कम करने के लिए, बिजली मंत्रालय (एमओपी), भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों दिनांक 15 जनवरी 2015 के अनुसार टॉवर बेस के लिए भूमि की लागत और कॉरिडोर में घटती भूमि मूल्य का मुआवजा, उन सभी राज्यों में दिया जा रहा है , जहाँ राज्य सरकारों ने उक्त दिशा निर्देशों की अधिसूचित कर दिया है

सामुदायिक विकास कार्य

पावरग्रिड अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को पहचानता है और उन समुदायों को अत्यधिक महत्व प्रदान करता है जिनके साथ हम स्थानीय संसाधनों को साझा करते हैं। सामाजिक विवेक का अभ्यास करने के लिए पावरग्रिड की प्रतिबद्धता इस अहसास से उपजी है कि किसी भी व्यावसायिक गतिविधि का अंतिम लक्ष्य वित्तीय लाभप्रदता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें व्यापक और बहुत वांछित सामाजिक कल्याण शामिल है। पावरग्रिड, अपने कॉर्पोरेट दर्शन के हिस्से के रूप में, सामाजिक प्रभावों सहित अपनी व्यावसायिक प्रक्रियाओं से जुड़ी नकारात्मक बाहरीताओं को आंतरिक करने के लिए सभी स्तरों पर प्रतिबद्ध है। इसमें पर्यावरणीय प्रभावों को कम करना और कम करना, सामाजिक मुद्दों को संबोधित करना और समुदाय के विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए उपयुक्त और समावेशी सीएसआर पहल/हस्तक्षेप करना शामिल है। कुछ उदाहरण नीचे दिखाए गए हैं

विमर्श द्वारा निजी खरीद के माध्यम से भूमि सुरक्षित करना

अच्छे अभ्यास के रूप में और पारस्परिक रूप से लाभकारी हितधारक संबंध सुनिश्चित करने के लिए, पावरग्रिड ने "भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्वास में उचित मुआवजे और पारदर्शिता का अधिकार (आरएफसीटीएलएआरआर) अधिनियम, 2013" के प्रावधानों को लागू करके अनैच्छिक भूमि अधिग्रहण की प्रथा को छोड़ दिया है। अब हम अधिकांश सबस्टेशनों के लिए भूस्वामियों की सहमति के माध्यम से "इच्छुक क्रेता इच्छुक विक्रेता" आधार पर या तो सीधे भूस्वामियों से या संबंधित राज्य सरकारों की नीतियों के आधार पर आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम, 2013 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत जमीन हासिल कर रहे हैं।

 

रद्दी कागज़ के पुनर्चक्रण संयंत्र की स्थापना

कार्पोरेट कार्यालय में सृजित रद्दी कागज़ का पुनर्चक्रण करने के लिए सितंबर 2012 से रद्दी कागज़ पुनर्चक्रण संयंत्र प्रचालित है जिससे वृक्ष, जल आदि जैसे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होता है और साथ ही खुले बाज़ार से कागज़ / लेखन सामग्री की खरीद में कमी लाई जाती है। हमारे कार्बन पदचिन्हो में और कमी आयी है और 1 टन मूल मुद्रण कागज़ के लिए 17 वृक्षों, 4 किलोलीटर पानी और 1350 कि.वॉ. बिजली की ज़रूरत पड़ती है, हेतु कार्बन फुटप्रिंट की अतिरिक्त कटौती की गई।