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स्मार्ट ग्रिड

स्मार्ट ग्रिड सूचना, संचार और इलेक्ट्रिकल / डिजिटल प्रौद्योगिकी का संगम है. स्मार्ट ग्रिड, वास्तविक समय निगरानी और बिजली व्यवस्था के नियंत्रण की सुविधा के अलावा एटी एंड सी नुकसान की कमी, पीक लोड प्रतिक्रिया / मांग प्रबंधन, अक्षय ऊर्जा के एकीकरण, बिजली की गुणवत्ता प्रबंधन, आउटेज प्रबंधन आदि में मदद मिलेगी. स्मार्ट ग्रिड एक रीढ़ के बुनियादी ढांचे के रूप में कार्य करने के लिए स्मार्ट शहर, बिजली के वाहनों, स्मार्ट और अधिक लचीला और कुशल ऊर्जा प्रणाली और टैरिफ संरचनाओं से अलग समुदायों की तरह नए व्यापार मॉडल सक्षम हो जाएगा.

बढ़ती जटिलता और बिजली प्रणालियों का प्रबंधन, अक्षय स्रोतों से बढ़ती पैठ के स्तर, बढ़ती मांग और सेवा प्रणाली विश्वसनीयता, दक्षता और पर्यावरण ऊर्जा स्थिरता के मुद्दों के अलावा सुरक्षा के मामले में उचित मूल्य की उम्मीदों पर गुणवत्ता, स्मार्ट ग्रिड के विकास ट्रिगर .

बुद्धिमान कुशल और विश्वसनीय अंत करने के लिए अंत में दो तरह से स्रोत से वितरण प्रणाली के लिए अक्षय ऊर्जा स्रोतों के एकीकरण, स्मार्ट ट्रांसमिशन और वितरण प्रणाली के माध्यम से दोनों बिजली और सूचना सिंक.

सह तालमेल सभी जनरेटर, ग्रिड ऑपरेटरों, वितरण उपयोगिताओं, अंत उपयोगकर्ताओं को इस तरह है कि यह संपत्ति उपयोग, संसाधन अनुकूलन, नियंत्रण और संचालन के साथ ही कमी का अनुकूलन कर सकते हैं और बिजली बाजार हितधारकों की आवश्यकताओं और क्षमताओं को इस तरह के ग्रिड में सक्षम हो जाएगा घाटे में. इस प्रक्रिया में, स्मार्ट ग्रिड लागत को कम करने, एटी एंड सी घाटा, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण प्रभावों में सुधार, जबकि गुणवत्ता में सुधार और ऊर्जा दक्षता उपायों में ग्राहकों की भागीदारी के साथ प्रणाली की विश्वसनीयता को बनाए रखने. निगरानी और माप, नियंत्रण, संचार और स्वचालन, उन्नत मीटर के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी, आईटी अवसंरचना, ऊर्जा संग्रहण, अक्षय पीढ़ी आदि स्मार्ट ग्रिड के सफल विकास की दिशा में प्रमुख भूमिका है. इस तरह, स्मार्ट ग्रिड दक्षता और हमारे देश में स्थिरता लाने के लिए, सुरक्षा, विश्वसनीयता, लचीलापन, स्थिरता और गुणवत्ता का सबसे अच्छा के साथ बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने, जबकि बिजली की लागत को कम करने जाएगा

हरित ऊर्जा कॉरिडोर रिपोर्ट

 

12 वीं पंचवर्षीय योजना में परिकल्पित अक्षय ऊर्जा क्षमता वृद्धि के एकीकरण के लिए पावर ग्रिड ने एक व्यापक योजना को “हरित ऊर्जा कॉरिडोर रिपोर्ट” के रूप में प्रस्तुत किया है। 12 वीं पंचवर्षीय योजना में आठ (8) अक्षय समृद्ध राज्यों (तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर) में 43GW क्षमता, मुख्यत: पवन और सौर के माध्यम से, परिकल्पना की गई है । इस योजना में राज्यांतरिक और अंतरराज्यीय विद्युत पारेषण प्रणाली को मजबूत बनाने तथा अन्य संबंधित तकनीकों जैसे गत्यात्मक रिएक्टिव प्रतिपूर्ति, ऊर्जा भंडारण, स्मार्ट ग्रिड अनुप्रयोगों, अक्षय ऊर्जा उत्पादन, वास्तविक सम में निगरानी, अक्षय ऊर्जा प्रबंधन केंद्र की स्थापना, बिजली चालित वाहनों, निवेश आदि को शामिल किया गया है। इसमें सन 2030 तक अक्षय ऊर्जा के एकीकरण के लिए योजना के परिप्रेक्ष्य को भी शामिल किया गया है।

हरित ऊर्जा कॉरिडोर रिपोर्ट के खंड-द्वितीय में विभिन्न राज्यों में अक्षय ऊर्जा स्थापना, भार प्रवाह अध्ययन के परिणाम, विभिन्न संलग्नक, दस्तावेज और परिशिष्ट आदि को शामिल किया गया है।

 

हरित ऊर्जा कॉरीडोर–II रिपोर्ट  

 भारत सरकार की 2022 तक 1,00,000 मेगावाट सौर क्षमता विकसित करने की एक महत्वाकांक्षी योजना है। "हरित ऊर्जा कॉरिडोर-II"  रिपोर्ट, 1, 00,000 मेगावाट कुल सौर क्षमता मे से विभिन्न राज्यों में परिकल्पित 34 सोलर पार्क से 20,000 मेगावाट सौर क्षमता को एकीकृत करने के लिए व्यापक पारेषण योजना हैं। इस योजना मे 12,800 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से इंटर स्टेट और इंट्रा स्टेट मे 7200 ckm की पारेषण लाइने और 28,700 MVA की परिवर्तन क्षमता का निर्माण शामिल हैं।  डाउनलोड करें |  (23.3 MB) PDF 

अक्षय ऊर्जा एकीकरण - पारेषण एक संबल  

पवन और सौर ऊर्जा उत्पादन अपनी निहित विशिष्टता के कारण परिवर्तनीय है और ग्रिड सुरक्षा और सिस्टम स्थिरता के लिए चुनौती बन गया है। ग्रिड में अक्षय ऊर्जा एकीकरण की सुविधा के लिए, पारेषण और संतुलन के भंडार की आवश्यकता है। "अक्षय ऊर्जा एकीकरण - पारेषण एक संबल" रिपोर्ट में आरक्षित संतुलन भंडार की आवश्यकता, संतुलन साधने के स्रोतों के साथ-साथ परिवर्तनीय और अनिरंतर उत्पादन के कारण प्रणाली की स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया गया है। डाउनलोड करें |  (5.4 MB) PDF

डेजर्ट पावर भारत पर रिपोर्ट - 2050

सौर और पवन जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के बड़े पैमाने पर विकास कि जरूरत को समझते हुए, पावरग्रिड ने भारत के राजस्थान (थार), गुजरात (कच्छ के रण), हिमाचल प्रदेश (लाहौल एवं स्पीति घाटी) और जम्मू-कश्मीर (लद्दाख) राज्यों के रेगिस्तानी क्षेत्रों में बंजर भूमि के उपयोग के विकास पर डेजर्ट पावर 2050 अध्ययन रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट, भारतीय रेगिस्तान में मुख्य रूप से सौर/पवन के माध्यम से 300GW की अक्षय ऊर्जा और मध्यम अवधि और लंबी अवधि के परिदृश्य में इसके विकास को परिकल्पित करती है। यह रिपोर्ट रेगिस्तान क्षेत्रों में अक्षय ऊर्जा उत्पादन के एकीकरण, ग्रिड संतुलन और स्पिनिंग रिजर्व के लिये बुनियादी सुविधाओं की आवश्यकताओं, डेजर्ट पावर विकास की चुनौतियों और प्रभावों, अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में अनुसंधान, विकास एवं प्रदर्शन/ स्वदेशी विनिर्माण रेगिस्तान में ऊर्जा क्षमता विकास में निवेश आदि के लिये विद्युत पारेषण बुनियादी ढांचे की आवश्यकता का वर्णन करती है। डाउनलोड करें | (19.5 MB) PDF