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टावरों को जल्द लीज पर देगी पावरग्रिड

देश की सबसे बड़ी ऊर्जा पारेषण कंपनी पावर ग्रिड इस माह के अंत तक अपने टावरों को लीज पर देने के एक करार पर निर्णय कर करती है। पावर ग्रिड इन टावरों को दूरसंचार के मकसद से बुनियादी ढांचे के लिए लीज पर देगी। कंपनी ने पिछले साल दिसंबर में व्योम नेटवक्र्स और माइक्रोक्यूअल टेक्नो को टावर लीज पर देने के लिए छांटा था। पावर ग्रिड के अधिकारी ने कहा कि कंपनी निविदा को अंतिम रूप देने में जुटी है, उम्मीद है कि इस माह के अंत तक यह पूरा हो जाएगा। हालांकि उन्होंने करार के आकार के बारे में कुछ भी कहने से मना कर दिया। पावर ग्रिड ने केंद्रीय बिजली नियामक प्राधिकरण को अपनी इस योजना के बारे में पहले ही सूचित कर चुकी है। कंपनी की ओर से चार राज्यों के करीब 12,000 टावरों को लीज पर देने के लिए बोलियां मंगाई गई थीं। ये बोलियां स्वतंत्र टावर कंपनियों या मोबाइल सेवा प्रदाताओं से आमंत्रित की गई थी। कंपनी के पास देशभर में करीब 1.5 लाख टावर हैं, जिनमें से 70 फीसदी टावर अर्ध शहरी और ग्रामीण इलाकों में हैं। उक्त अधिकारी ने कहा कि अन्य इलाकों के टावरों के लिए भी कंपनी जल्द ही निविदा लाएगी। बीते वित्त वर्ष की पहली छमाही में पावर ग्रिड को निदेशक मंडल से टावरों को लीज पर देने और नए कारोबार में उतरने की सैद्घांतिक मंजूरी मिली थी। कंपनी अगले 4 से 5 साल में दूरसंचार कारोबार से 350 से 400 करोड़ रुपये आय की उम्मीद कर रही है। अभी इस सेगमेंट से कंपनी को सालाना 150 करोड़ रुपये की आमदनी हो रही है। भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है और नई कंपनियां भी इस क्षेत्र में उतर रही हैं, जिससे लागत कम करने के लिए कंपनियां बुनियादी ढांचे को साझा करने की संभावना तलाश रही हैं। एक टावर लगाने में करीब 10 से 15 लाख रुपये की लागत आती है। पावर ग्रिड करीब 4 साल पहले दूरसंचार क्षेत्र में उतरी थी। कंपनी अपने पारेषण ढांचा के तहत दूरसंचार ऑपरेटरों को बैंडविथ लीज पर देती है और अब टावरों को भी लीज पर देने की है तैयारी।